अबू धाबी में ईरानी मिसाइल हमले के बाद भारतीय नागरिक घायल, केज़ाद इलाके में लगी आग, पहले ही हो चुकी है एक भारतीय की मौत
गल्फ क्षेत्र में बढ़ते तनाव से Indian expats की सुरक्षा पर खतरा, UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल को किया नाकाम लेकिन मलबे से हुआ नुकसान
अबू धाबी/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर एक बार फिर Gulf देशों में रहने वाले भारतीयों पर देखने को मिला है। शनिवार (28 मार्च, 2026) को अबू धाबी में ईरान की ओर से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया, लेकिन इसके मलबे के गिरने से केज़ाद (Khalifa Economic Zones Abu Dhabi – KEZAD) इलाके में दो जगह आग लग गई और पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए .
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब गुरुवार (26 मार्च) को भी अबू धाबी के स्वेहान स्ट्रीट इलाके में मिसाइल रोकथाम के मलबे से एक भारतीय नागरिक की जान चली गई थी और तीन अन्य घायल हो गए थे . इस हफ्ते में यह दूसरी बार है जब इस युद्ध का खामियाजा Indian expat समुदाय को भुगतना पड़ा है.
क्या हुआ? जानिए पूरी घटना
शनिवार सुबह अबू धाबी और दुबई में मिसाइल हमले की आशंका को लेकर अलर्ट जारी किया गया था. UAE के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया . इस दौरान अबू धाबी और दुबई में तेज आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और खिड़कियों-दरवाजों से दूर रहने की हिदायत दी गई .
हालांकि, नाकामी के बाद मिसाइल का मलबा केज़ाद इलाके में गिर गया, जिससे वहां दो फायर की घटनाएं हुईं . अबू धाबी मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की कि इस घटना में पांच भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनकी चोटें मामूली से मध्यम बताई गई हैं . अधिकारियों ने तुरंत मौके पर राहत सेवाएं भेज दीं और आग पर काबू पा लिया गया .
हफ्ते भर में दूसरी घटना: गुरुवार को हुई थी एक भारतीय की मौत
इससे पहले गुरुवार (26 मार्च) को अबू धाबी के स्वेहान स्ट्रीट इलाके में भी ऐसी ही घटना हुई थी. वहां भी मिसाइल रोकथाम के बाद गिरे मलबे की चपेट में आने से पाकिस्तान और भारत के दो नागरिकों की जान चली गई थी . इस घटना में एक भारतीय समेत तीन अन्य लोग घायल भी हुए थे . भारतीय दूतावास ने गुरुवार को ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस घटना पर दुख जताया था और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था .
क्यों बढ़ रहा है खतरा? मिडिल ईस्ट में युद्ध का बड़ा परिदृश्य
इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में मिडिल ईस्ट में युद्ध लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है. अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए, जिसके बाद ईरान भी गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है . एक महीने पहले शुरू हुए इस युद्ध में अब तक UAE पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और हजारों की संख्या में ड्रोन हमले किए जा चुके हैं .
हाल ही में यमन के हौथी विद्रोहियों ने भी इजराइल पर मिसाइल दागने की बात कही है, जिससे युद्ध और व्यापक होने का खतरा पैदा हो गया है . UAE, सऊदी अरब और बहरीन समेत कई गल्फ देश इस युद्ध की चपेट में आ गए हैं. इन देशों की एयर डिफेंस सिस्टम भले ही मिसाइलों को नाकाम कर रही हों, लेकिन गिरने वाला मलबा जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है .
भारतीयों पर क्या असर? एक्सपैट समुदाय के लिए बढ़ी चिंता
खाड़ी देशों में सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय भारतीयों का है. UAE में ही करीब 35 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं. युद्ध की वजह से इनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. अब तक कई नागरिकों की जान चली गई है, जिनमें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, फिलिस्तीन और भारत के नागरिक शामिल हैं .
भारतीय दूतावास ने लगातार अपने नागरिकों से सतर्क रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है . UAE पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि वे गिरे हुए मलबे को न छुएं और न ही उसकी तस्वीरें लें, क्योंकि ये खतरनाक हो सकते हैं .
ग्लोबल इकॉनमी पर भी बढ़ता दबाव
यह युद्ध सिर्फ इलाकाई संघर्ष तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट संघर्ष ने 2026 की वैश्विक आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर दिया है . होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा शिपमेंट लगभग ठप हो गई है, जिससे महंगाई दर में बड़ा उछाल आने की आशंका है . विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 2026 के लिए महंगाई दर पहले के अनुमान से अधिक रह सकती है .
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक प्रयास
युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है . संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने चेतावनी दी है कि युद्ध नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है और उन्होंने एक वरिष्ठ राजनयिक को मिडिल ईस्ट संघर्ष के लिए अपना विशेष दूत नियुक्त किया है .
अमेरिकी प्रशासन ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पश्चिम एशिया संकट पर फोन पर बातचीत हुई थी .
आगे क्या?
UAE की एयर डिफेंस सिस्टम भले ही अत्याधुनिक है, लेकिन युद्ध जब तक पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहेगा. मिसाइल रोकथाम के बाद गिरने वाला मलबा नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. भारत सरकार और भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
निष्कर्ष:
अबू धाबी में एक बार फिर मिसाइल हमले के मलबे से भारतीय नागरिकों के घायल होने की घटना ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट का युद्ध अब सीमाओं से बाहर निकलकर आम नागरिकों की जानलेवा बन चुका है. एक हफ्ते में दूसरी बार Indian expat समुदाय पर आया यह संकट भारत सरकार और UAE प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम की ठोस पहल नहीं होती, तब तक इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहेगा.
लेखक: इन्फोविजन मीडिया इंटरनेशनल डेस्क
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