तेहरान, 22 मार्च 2026 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे की समय सीमा देने के बाद तेहरान ने सख्त जवाब दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके बिजली संयंत्रों पर हमला किया गया तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया जाएगा।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर गालीबाफ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जैसे ही ईरान के बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा, पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा और तेल सुविधाओं को वैध लक्ष्य माना जाएगा और उन्हें भारी क्षति पहुंचाई जाएगी।
ट्रंप की चेतावनी: 48 घंटे का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से और बिना किसी धमकी के नहीं खोलता है, तो अमेरिका उनके विभिन्न बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा और उन्हें नष्ट कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।
ट्रंप ने यह पोस्ट शनिवार शाम को की थी, जिसका मतलब है कि यह अल्टीमेटम सोमवार देर रात तक समाप्त होगा।
ईरान की चेतावनी: कालापानी से लेकर डीजल प्लांट तक होंगे निशाने
ईरान की प्राथमिक सैन्य कमान ने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान के ईंधन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया, तो क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल से जुड़ी सभी ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और जल शोधन सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा।
ईरानी मीडिया में जारी सैटेलाइट मानचित्रों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के तटीय बिजली संयंत्रों को निशाने पर रखा है। इनमें शामिल हैं:
- कतर का रास लाफान उत्तरी संयंत्र
- दुबई का जेबेल अली दक्षिणी संयंत्र
- कुवैत के अल-जोर उत्तर और दक्षिण संयंत्र
- सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित सुविधाएं
- बहरीन और शारजाह में स्थित ऊर्जा ठिकाने
ईरान ने दावा किया है कि वह शहाब-3, एमाद और फतेह-313 जैसी छोटी और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ शाहेद-शैली के ड्रोन का उपयोग करके इन लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।
जल शोधन संयंत्रों पर हमले से पेयजल संकट की आशंका
ईरान की धमकी का सबसे बड़ा असर खाड़ी देशों की पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में अधिकांश ताजे पानी की आपूर्ति जल शोधन संयंत्रों पर निर्भर करती है। ये संयंत्र अक्सर बिजली संयंत्रों के साथ एकीकृत होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देश अपनी पेयजल आपूर्ति के लिए एक ही तटीय क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर हैं। इन पर हमले से दुबई, दोहा, रियाद और कुवैत सिटी जैसे प्रमुख शहरों में पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी है तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के एक बड़े हिस्से के परिवहन का प्रमुख मार्ग है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।
ईरान के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन में प्रतिनिधि ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए खुला है, सिवाय उन जहाजों के जो “ईरान के दुश्मनों” से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ सुरक्षा व्यवस्था के समन्वय से जहाजों का गुजरना संभव है।
इजरायल पर हमले और नुकसान
शनिवार शाम को ईरान की ओर से इजरायल के दक्षिणी शहरों दीमोना और अराद में बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए गए। इजरायली आपात सेवाओं के अनुसार, इन हमलों में 100 से अधिक लोग घायल हो गए।
दीमोना शहर नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र से कुछ दूरी पर स्थित है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने कहा कि उसे इस परमाणु सुविधा को किसी भी नुकसान की जानकारी नहीं है।
अराद शहर में रहने वाले एक ब्रिटिश मूल के इजरायली नागरिक ने बताया कि मिसाइल हमले में उनके घर की दीवारें हिल गईं और पास की इमारतों को भारी क्षति पहुंची।
अमेरिका ने ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाए
तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव के बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार को एक विशेष लाइसेंस जारी करते हुए समुद्र में मौजूद ईरानी तेल पर 30 दिनों के लिए प्रतिबंध हटा दिए हैं। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने के कारण उत्पन्न आपूर्ति संकट को दूर करने के लिए उठाया गया है।
गौरतलब है कि फरवरी के अंत से शुरू हुए इस युद्ध के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हो चुकी है।
कूटनीति की गुंजाइश?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा था कि कई देशों ने समाधान खोजने के लिए ईरान से संपर्क किया है। ओमान ने कूटनीति के माध्यम से इस संकट को सुलझाने में सबसे अधिक रुचि दिखाई है।
हालांकि, ईरान के सांसद अलाएद्दीन बोरूजर्दी ने राज्य टीवी पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुछ जहाजों से ईरान शुल्क वसूल रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध की लागत होती है और यह ईरान के अधिकार को दर्शाता है।
आगे क्या?
ट्रंप की 48 घंटे की समय सीमा सोमवार देर रात समाप्त होगी। आने वाले घंटों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ईरान इस मांग को मानता है या फिर यह संघर्ष और भी व्यापक रूप लेता है। खाड़ी देशों की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक तेल की कीमतें और पूरे क्षेत्र की स्थिरता दांव पर लगी हुई है।
नोट: यह लेख विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। यह एक विकासशील मामला है, नई जानकारी मिलने पर विवरण में बदलाव संभव है।
