वाशिंगटन, 22 मार्च 2026 – नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने एक बार फिर ब्रह्मांड की अनोखी तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। हबल ने मेसियर 64 (Messier 64) नामक सर्पिल आकाशगंगा की शानदार तस्वीर खींची है, जिसे ‘ईविल आई’ (Evil Eye) यानी ‘बुरी नजर’ वाली आकाशगंगा के नाम से जाना जाता है ।
हबल ने यह तस्वीर अलग-अलग प्रकाश तरंगों में कैप्चर की है। इस तस्वीर में इस आकाशगंगा का केंद्र साफ दिखाई दे रहा है, जिसके चारों ओर धूल का एक काला घेरा है। यहीं से इस आकाशगंगा को ‘बुरी नजर’ वाली आकाशगंगा नाम मिला है ।
क्या है ‘ईविल आई’ गैलेक्सी?
‘ईविल आई’ गैलेक्सी, जिसे ब्लैक आई गैलेक्सी या M64 के नाम से भी जाना जाता है, पृथ्वी से लाखों प्रकाश वर्ष दूर स्थित है । यह आकाशगंगा कोमा बेरेनिसेस (Coma Berenices) तारामंडल में मौजूद है । यह सर्पिल आकाशगंगा काफी विस्तृत है और इसमें अरबों तारे मौजूद हैं ।
इस आकाशगंगा की सबसे खास बात इसकी आंतरिक गति है। वैज्ञानिकों के अनुसार, M64 के बाहरी हिस्सों में मौजूद गैस भीतरी हिस्सों में मौजूद तारों और गैस से उल्टी दिशा में घूम रही है । यह असामान्य व्यवहार अरबों साल पहले M64 और किसी छोटी आकाशगंगा के बीच हुए टकराव का नतीजा माना जाता है ।
‘बुरी नजर’ का रहस्य
इस आकाशगंगा को ‘बुरी नजर’ (Evil Eye) नाम इसके चमकीले केंद्र के सामने मौजूद धूल के काले घेरे के कारण मिला है । यह धूल का घेरा इसके केंद्र को आंशिक रूप से ढक लेता है, जिससे यह आंख जैसी दिखती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धूल भी उसी टकराव के कारण बनी है जिसने इसकी गति को प्रभावित किया ।
इस आकाशगंगा के केंद्र में एक विशाल ब्लैक होल मौजूद है। खगोलविदों का अनुमान है कि इस ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का कई गुना है । M64 को ‘सेफर्ट गैलेक्सी’ (Seyfert galaxy) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, यानी इसका केंद्रीय क्षेत्र इतना चमकीला है कि यह आकाशगंगा के अन्य सभी तारों की रोशनी को मात दे देता है ।
तारों का जन्म और खूबसूरत नजारा
हबल द्वारा कैप्चर की गई तस्वीर में इस आकाशगंगा में गुलाबी रंग के धब्बे दिखाई दे रहे हैं। ये धब्बे उन क्षेत्रों को दर्शाते हैं जहां नए तारे जन्म ले रहे हैं । वहीं, नीली रोशनी युवा और गर्म तारों से निकलने वाली ऊर्जा को दर्शाती है ।
आकाशगंगा के अंदरूनी हिस्से में गैसों के आपस में टकराने से नई तारों का निर्माण लगातार हो रहा है । यह प्रक्रिया ‘ईविल आई’ को एक जीवंत और सक्रिय आकाशगंगा बनाए रखती है।
इतिहास और खोज
M64 की खोज सबसे पहले 18वीं शताब्दी के अंत में एक अंग्रेज खगोलशास्त्री ने की थी । इसके कुछ समय बाद जर्मन और फ्रांसीसी खगोलशास्त्रियों ने भी इसे अपनी खोजों में शामिल किया । फ्रांसीसी खगोलशास्त्री चार्ल्स मेसियर ने इसे अपनी प्रसिद्ध सूची में 64वें नंबर पर शामिल किया, जिससे इसका नाम Messier 64 पड़ा ।
कब और कैसे देख सकते हैं?
यह आकाशगंगा शौकिया खगोलविदों के बीच काफी लोकप्रिय है क्योंकि इसे जमीन पर लगी सामान्य दूरबीन से भी देखा जा सकता है । M64 को देखने के लिए वसंत ऋतु का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है । इस समय यह आकाशगंगा रात के समय सबसे अच्छी स्थिति में होती है।
हबल स्पेस टेलीस्कोप की यह नवीनतम तस्वीर एक बार फिर ब्रह्मांड की जटिलताओं और खूबसूरती को उजागर करती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि M64 जैसी आकाशगंगाओं के अध्ययन से ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के निर्माण और विकास के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
नोट: यह लेख नासा और ESA द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी और विभिन्न अंतरिक्ष विज्ञान वेबसाइटों पर आधारित है।
