नई दिल्ली, 22 मार्च 2026 – राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से धूल की मोटी परत छाई हुई है। सुबह के समय आसमान धुंध से ढका रहता है और दिन में भी हवा में धूल साफ नजर आ रही है। हाल ही में हुई बारिश के बाद कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। आइए जानते हैं कि आखिर यह धूल कहां से आ रही है और दिल्ली की हवा इतनी गंदी क्यों हो रही है।
बारिश के बाद फिर बढ़ा प्रदूषण
गुरुवार 19 मार्च को दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश और तेज हवाएं चलीं, जिससे तापमान में गिरावट आई और प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह बारिश तीन साल में मार्च महीने की सबसे अधिक वर्षा थी ।
बारिश के बाद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज किया गया । आनंद विहार, द्वारका, आरके पुरम, चांदनी चौक सहित कई इलाकों में AQI इसी श्रेणी में रहा । लेकिन मौसम विशेषज्ञों की मानें तो यह राहत अस्थायी थी। तापमान बढ़ते ही धूल फिर से हवा में उड़ने लगी है ।
कहां से आ रही है यह धूल?
मौसम विभाग और निजी मौसम एजेंसियों के विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में छाई धूल की यह परत राजस्थान के थार रेगिस्तान और पाकिस्तान से आ रही है ।
कैसे पहुंची धूल दिल्ली?
विशेषज्ञों ने इसकी पूरी प्रक्रिया समझाई है :
- शुरुआत – पिछले सप्ताह बलूचिस्तान और मध्य पाकिस्तान से तेज पश्चिमी हवाएं चलीं।
- उड़ान – ये हवाएं राजस्थान के थार रेगिस्तान से गुज़रीं और वहां की ढीली धूल को अपने साथ उठा लिया।
- रुकावट – पिछले 1-2 दिनों में हवा की रफ्तार अचानक कम हो गई।
- फंसना – तेज हवा न होने के कारण यह धूल नीचे की परतों में फंस गई और यहीं जमा रह गई।
मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि धूल हवा में तैर रही है और बाहर नहीं जा पा रही है, इसलिए प्रदूषण बढ़ गया है और दृश्यता कम हो गई है ।
ईरान से आ रहा ‘जहरीला बादल’? भ्रम है
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक खबर वायरल हो रही है कि ईरान में बमबारी से निकला जहरीला धुआं दिल्ली पहुंच रहा है। मौसम विभाग ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है ।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि :
- ईरान से दिल्ली की दूरी हजारों किलोमीटर है, इतनी दूर से प्रदूषण आना मुश्किल है।
- अगर आए भी, तो इतनी दूरी तय करते-करते यह इतना फैल जाता है कि असर नहीं होता।
- हवा की दिशा भी फिलहाल ऐसी है कि धुआं भारत की ओर नहीं बढ़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञों ने साफ कहा कि ईरान का धुआं दिल्ली पहुंचने की आशंका न के बराबर है। यह स्थानीय मौसमी घटना है ।
गर्मी और धूल का खतरनाक संगम
मार्च के महीने में दिल्ली का तापमान सामान्य से अधिक चल रहा है। हाल के दिनों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था । गर्मी बढ़ने से हवा में मौजूद धूल और भी सक्रिय हो जाती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट बताती है कि गर्मियों में दिल्ली के प्रदूषण में धूल (सड़क, निर्माण, मिट्टी) की हिस्सेदारी सबसे अधिक होती है । इसके अलावा वाहनों का धुआं, उद्योग और बायोमास जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है ।
धूल का सेहत पर कितना असर?
हवा में धूल के कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, धूल में मौजूद महीन कण फेफड़ों की बीमारियों, अस्थमा, एलर्जी और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। डॉक्टरों की सलाह है कि धूल भरे मौसम में घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनना चाहिए और घर में हवा को साफ रखने के उपाय करने चाहिए।
कब मिलेगी राहत?
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24-48 घंटों में पश्चिमी हवाएं फिर से तेज हो सकती हैं । जब हवा की रफ्तार बढ़ेगी, तो यह धूल उड़कर बाहर निकल जाएगी। तब दृश्यता साफ होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च-अप्रैल में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने से ऐसे मौसमी बदलाव सामान्य हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, वैसे-वैसे धूल का स्तर भी उतार-चढ़ाव करता रहेगा ।
क्या करें, क्या न करें?
सावधानियां
- सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें, जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है।
- बाहर जाते समय मास्क जरूर पहनें।
- घर की खिड़कियां बंद रखें या हवा साफ करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करें।
- ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, इससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।
क्या न करें?
- सुबह की सैर या जॉगिंग से बचें।
- घर के बाहर कूड़ा-कचरा न जलाएं।
- निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से रोकने के उपाय करें।
सरकार की तैयारी
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कई निर्देश जारी किए हैं । हाल ही में AQI में सुधार के बाद कुछ प्रतिबंध हटा दिए गए थे ।
CAQM ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे धूल नियंत्रण के उपाय जारी रखें ताकि हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में न जाए । निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सड़कों पर पानी का छिड़काव और वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
निष्कर्ष
दिल्ली में इन दिनों जो धूल छाई हुई है, वह ईरान से नहीं, बल्कि राजस्थान के थार रेगिस्तान और पाकिस्तान से आई है। मौसमी हवाओं की रफ्तार कम होने के कारण यह धूल यहीं फंस गई है। आने वाले दिनों में हवा तेज होने पर राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक जरूरी है कि हम खुद को धूल से बचाने के उपाय करें और सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
नोट: यह लेख भारत मौसम विज्ञान विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है।
