नेपाल में सियासी हलचल: पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और गृहमंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी, 77 लोगों की मौत के मामले में होगी सुनवाई
बालेन शाह सरकार का पहला बड़ा एक्शन, ‘जेन जेड’ आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई के लिए पूर्व प्रशासन पर कार्रवाई
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में शनिवार (28 मार्च, 2026) को एक अहम घटना घटी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में की गई है ।
ओली की गिरफ्तारी नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के पदभार संभालने के ठीक एक दिन बाद हुई है। शाह की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही जांच समिति की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया, जिसके बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई ।
क्यों हुई गिरफ्तारी? जानिए पूरा मामला
सितंबर 2025 में नेपाल में एक बड़ा जनवादी विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसे ‘जेन जेड’ आंदोलन का नाम दिया गया। यह आंदोलन शुरू में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ था, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह बन गया ।
इस आंदोलन के दौरान 8 और 9 सितंबर को हुई हिंसा में कम से कम 77 लोगों की मौत हो गई थी और 2,300 से अधिक लोग घायल हो गए थे । पहले दिन की कार्रवाई में अकेले 19 युवाओं की जान चली गई थी। गुस्साई भीड़ ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यालयों, पुलिस स्टेशनों और कई नेताओं के आवासों को आग के हवाले कर दिया था ।
इस हिंसा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था ।
जांच समिति ने क्या कहा?
इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में ओली, लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खपुंग के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के आरोपों में जांच की सिफारिश की थी ।
समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह साबित नहीं हुआ कि गोली चलाने का आदेश दिया गया था, लेकिन गोलीबारी को रोकने या नियंत्रित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उनकी लापरवाही के कारण नाबालिगों ने भी अपनी जान गंवाई ।
रिपोर्ट में ओली पर यह भी कहा गया कि कार्यकारी प्रमुख होने के नाते, चाहे फैसला अच्छा हो या बुरा, ओली इसके लिए जिम्मेदार हैं । समिति ने सिफारिश की है कि ओली, लेखक और खपुंग के खिलाफ राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत आपराधिक लापरवाही का मामला चलाया जाए, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है ।
नई सरकार का पहला बड़ा फैसला
रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों में बड़ी जीत हासिल की थी । उनकी पार्टी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने सुधार और सितंबर 2025 के आंदोलन के पीड़ितों के लिए न्याय के एजेंडे पर चुनाव लड़ा था ।
शाह के शपथ लेने के एक दिन बाद शुक्रवार (27 मार्च) को हुई पहली कैबिनेट बैठक में जांच समिति की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया । इसके बाद शनिवार सुबह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ओली और लेखक को उनके आवासों से हिरासत में ले लिया ।
नेपाल के नए गृहमंत्री सुदान गुरुंग, जो खुद इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे थे, ने इस कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने कहा कि वादा वादा होता है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी के खिलाफ बदला नहीं है, बल्कि न्याय की शुरुआत है और उन्हें विश्वास है कि अब देश एक नई दिशा लेगा ।
गिरफ्तारी का विरोध और ओली का बयान
ओली नेता नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी – UML) के प्रमुख हैं, जबकि लेखक नेपाली कांग्रेस (NC) के वरिष्ठ नेता हैं। दोनों ही दलों ने जांच समिति की रिपोर्ट को अधूरा और पक्षपातपूर्ण बताया है ।
ओली ने खुद रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि यह चरित्र हनन और नफरत की राजनीति है । हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें प्रतिशोध के तहत गिरफ्तार किया गया है और वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे ।
गिरफ्तारी के विरोध में ओली की पार्टी UML ने आपात बैठक बुलाई है और सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है। पार्टी सचिव महेश बसनेत ने कहा कि यह उनके खिलाफ पूर्वाग्रह और बदला है ।
क्यों है यह घटना अहम?
नेपाल में किसी पूर्व प्रधानमंत्री की इस तरह से गिरफ्तारी अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। यह नेपाल की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि बालेन शाह सरकार का यह फैसला यह संदेश देता है कि नेपाल में अब सत्ता में बैठे लोग भी कानून से ऊपर नहीं हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार:
- जवाबदेही की नई मिसाल: यह गिरफ्तारी नेपाल की राजनीति में जवाबदेही की एक नई मिसाल पेश करती है। आम जनता के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए सबसे बड़े नेताओं को जिम्मेदार ठहराया गया है।
- बालेन शाह की विश्वसनीयता: रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने की दिशा में यह पहला कदम है। इससे उनकी सरकार की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- सियासी उथल-पुथल: ओली जैसे बड़े नेता की गिरफ्तारी से नेपाल की सियासत में हलचल मच सकती है। UML और NC जैसी बड़ी पार्टियां विरोध प्रदर्शन कर सकती हैं, जिससे देश में अल्पकालिक अस्थिरता के हालात बन सकते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल ओली और लेखक को काठमांडू जिला पुलिस कार्यालय ले जाया गया है। उनके खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र दायर किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। अगर उन्हें दोषी पाया जाता है तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है ।
हालांकि, ओली के समर्थक पहले से ही सड़कों पर उतर आए हैं और आने वाले दिनों में नेपाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बालेन शाह सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है और क्या यह कार्रवाई नेपाल की राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत करती है।
निष्कर्ष:
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी ने पड़ोसी देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। ‘जेन जेड’ आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की यह कोशिश नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज की जाएगी। अब सबकी निगाहें इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और ओली के समर्थकों के विरोध प्रदर्शनों पर टिकी हैं।
लेखक: इन्फोविजन मीडिया इंटरनेशनल डेस्क
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