नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, जानिए कब से शुरू होंगी उड़ानें और क्या है खासियत
जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण तैयार, 1.2 करोड़ यात्रियों की सालाना क्षमता, मई 2026 से शुरू हो सकती हैं उड़ानें
नोएडा/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में देश के सबसे महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आज (28 मार्च, 2026) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू भी मौजूद रहे ।
प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह करीब 11:30 बजे एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का निरीक्षण किया और करीब दोपहर 12 बजे इसके पहले चरण का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित किया । इस उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसके पास पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं ।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
उद्घाटन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था कि 28 मार्च उत्तर प्रदेश और एनसीआर के लोगों के लिए बेहद अहम दिन है। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा और दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर दबाव कम करेगा ।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने इस परियोजना को “विकसित भारत” की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का नया केंद्र बनेगा। कार्गो सुविधाओं के विस्तार से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे ।
नोएडा एयरपोर्ट: आंकड़ों में पूरी तस्वीर
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया गया है । यह प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाया गया है और इसका संचालन एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ऑपरेटर की भारतीय सब्सिडियरी द्वारा किया जा रहा है ।
- कुल परियोजना लागत (चारों चरण): करीब 29,560 करोड़ रुपये
- पहले चरण की लागत: करीब 11,282 करोड़ रुपये
- यात्री क्षमता (पहला चरण): 1.2 करोड़ यात्री प्रति वर्ष
- विस्तारित क्षमता (सभी चरण): 7 करोड़ यात्री प्रति वर्ष
- रनवे: 3,900 मीटर लंबा, जो बड़े विमानों को संभालने में सक्षम है
- आईएटीए कोड: डीएक्सएन (DXN)
- कार्गो क्षमता: 2.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (विस्तारित होकर 18 लाख मीट्रिक टन तक)
- एमआरओ सुविधा: 40 एकड़ में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) सुविधा का उद्घाटन भी किया गया
उड़ानें कब शुरू होंगी?
हालांकि एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च को हो गया है, लेकिन यहां से उड़ानों का संचालन तुरंत शुरू नहीं होगा। अधिकारियों के अनुसार, यात्री उड़ानों की शुरुआत मध्य अप्रैल से मई 2026 के बीच होने की संभावना है ।
देरी के पीछे कुछ नियामकीय प्रक्रियाएं हैं। सुरक्षा कार्यक्रम (ASP) का प्रमाणीकरण नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से होना अभी बाकी है। साथ ही, एयरपोर्ट की टैरिफ दरें तय होनी हैं, जिस पर नियामक संस्था ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। यह प्रक्रिया अप्रैल तक चलेगी, जिसके बाद टैरिफ तय होने में समय लग सकता है ।
कौन सी एयरलाइन्स होंगी शामिल?
इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इस एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानें संचालित करने की प्रतिबद्धता जताई है। शुरुआती चरण में मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ और देहरादून जैसे प्रमुख शहरों के लिए उड़ानें शुरू होने की संभावना है । अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 2026 के अंत तक शुरू हो सकती हैं ।
दिल्ली-एनसीआर के लिए राहत और नई संभावनाएं
दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जहां हर साल करोड़ों यात्री आवागमन करते हैं। यह क्षमता से अधिक भार झेल रहा था। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से IGI पर दबाव कम होगा और दोनों एयरपोर्ट मिलकर एकीकृत एविएशन सिस्टम के रूप में काम करेंगे । इससे दिल्ली-एनसीआर को एशिया के प्रमुख एविएशन हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट न सिर्फ हवाई यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा ।
रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या असर होगा?
जेवर एयरपोर्ट का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर पहले से ही दिखने लगा है। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे संपत्ति के दामों में तेजी से उछाल आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कॉरिडोर एनसीआर का सबसे मजबूत रियल एस्टेट कॉरिडोर बनकर उभरा है ।
कुछ अहम आंकड़े:
- पिछले कुछ वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे पर अपार्टमेंट की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है
- प्लॉट की कीमतों में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया है
- आने वाले समय में भी कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहने का अनुमान है
एक्सपर्ट्स की राय:
- विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सप्रेसवे के कुछ इलाकों में मिडिल-इनकम और लग्जरी सेगमेंट में खासी तेजी आएगी ।
- एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ ही बाजार अटकलों से हटकर मूलभूत विकास की ओर बढ़ रहा है। औद्योगिक गतिविधि, लॉजिस्टिक्स डिमांड और रोजगार सृजन से रेंटल यील्ड और लिक्विडिटी मजबूत होगी ।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रधानमंत्री के आगमन और इस भव्य आयोजन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे इलाके को सुरक्षा के कई स्तरों में घेरा गया था। हजारों पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था ।
कई एंट्री गेट्स पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे, जहां सख्त बैगेज स्क्रीनिंग और पहचान पत्र की जांच की गई । एंटी-सबोटेज चेक, बम डिस्पोजल स्क्वाड, और स्निफर डॉग्स को लगाया गया था । एंटी-ड्रोन सिस्टम को एक्टिव किया गया था और पूरे एरिया को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया था ।
क्विक रिएक्शन टीम्स (QRTs) को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया था और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही थी । राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस को भी अलर्ट पर रखा गया था । यातायात प्रबंधन की योजना बनाई गई थी और कई पार्किंग एरिया में बड़ी संख्या में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई थी ।
सस्टेनेबिलिटी और डिजाइन की खासियत
यह एयरपोर्ट पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे शून्य उत्सर्जन सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें ऊर्जा-कुशल प्रणालियां और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाएं शामिल की गई हैं ।
आर्किटेक्चरल डिजाइन भारतीय विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल भवन के डिजाइन में पारंपरिक घाटों और हवेलियों की झलक देखने को मिलती है, जो सांस्कृतिक सौंदर्य को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ती है । यात्रियों की सुविधा के लिए डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रोसेसिंग और सेल्फ-बैगेज ड्रॉप जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी ।
आगे की राह और संभावनाएं
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाला एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब है। यह यूपी को पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला पहला राज्य बनाता है और दिल्ली-एनसीआर को एविएशन हब के रूप में मजबूती प्रदान करता है ।
रियल एस्टेट से लेकर हॉस्पिटैलिटी तक, लॉजिस्टिक्स से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, इस एयरपोर्ट का असर हर सेक्टर पर दिखेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसके आसपास के बड़े प्रभाव क्षेत्र में करोड़ों लोगों की आबादी को फायदा होगा ।
निष्कर्ष:
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारतीय विमानन क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात के दबाव को कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार को भी नई ऊंचाई देगा। मई 2026 से यहां से उड़ानें शुरू होने के साथ ही इस परियोजना का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना शुरू हो जाएगा।
लेखक: इन्फोविजन मीडिया डेस्क
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