भारत में तेल के भंडार हैं फिर भी 90% तेल आयात क्यों? ड्रिलिंग क्यों नहीं हो रही? – जानिए 5 बड़ी वजहें
अंडमान से लेकर कृष्णा-गोदावरी बेसिन तक है तेल का खजाना, फिर क्यों हर साल लाखों करोड़ का तेल मंगाना पड़ता है?
नई दिल्ली: हर साल भारत करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कच्चा तेल आयात करता है। यह इतना बड़ा आंकड़ा है कि आम आदमी के मन में सवाल उठता है – आखिर भारत में तेल का भंडार है फिर आयात क्यों? तेल निकाला क्यों नहीं जाता?
यह सवाल बिल्कुल सही है। भारत के पास अंडमान निकोबार, कृष्णा-गोदावरी बेसिन, मुंबई के पास समुद्र, राजस्थान, और पूर्वोत्तर राज्यों में तेल और गैस के बड़े भंडार हैं। फिर भी हमें अपनी जरूरत का 85 से 90 फीसदी तेल विदेशों से मंगाना पड़ता है।
आज हम इस पहेली को सुलझाएंगे – क्यों भारत में तेल है फिर भी निकाला नहीं जा रहा, क्या है असली वजह, और आगे क्या होने वाला है।
अध्याय 1: भारत में कितना तेल है? – आंकड़ों में तस्वीर
पहले यह समझ लेते हैं कि भारत के पास आखिर कितना तेल है।
मौजूदा भंडार:
- भारत के पास करीब 59 अरब बैरल का कच्चा तेल भंडार है। यह पूरी दुनिया के तेल भंडार का सिर्फ 0.3 फीसदी है।
घरेलू उत्पादन:
- पिछले साल भारत ने 294 लाख टन कच्चा तेल निकाला।
- यह कुछ साल पहले के मुकाबले 18 फीसदी कम है। यानी पिछले 7-8 सालों से उत्पादन लगातार घट रहा है।
जरूरत कितनी है:
- भारत में हर साल 2.4 करोड़ टन से ज्यादा पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खपत होती है।
- देश रोजाना 5.5 मिलियन बैरल तेल खपत करता है।
- घरेलू उत्पादन सिर्फ 0.6 मिलियन बैरल प्रति दिन है।
यानी हम जितना तेल निकालते हैं, उससे 8-9 गुना ज्यादा खपत करते हैं। यही वजह है कि आयात पर निर्भरता 90 फीसदी तक पहुँच गई है।
अध्याय 2: तो तेल है फिर क्यों नहीं निकाल रहे? – 5 बड़ी वजहें
वजह 1: तेल है तो है, लेकिन निकालना मुश्किल है
भारत में जितना तेल है, उसमें से ज्यादातर समुद्र की गहराई में है। अंडमान बेसिन, कृष्णा-गोदावरी बेसिन, मुंबई के पास – ये सब समुद्र के अंदर हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए गहरे पानी में ड्रिलिंग करनी पड़ती है, जो बहुत महंगी और तकनीकी रूप से मुश्किल है।
दूसरे देशों के उदाहरण देखें तो पता चलता है कि सैकड़ों कुएँ खोदने के बाद ही कुछ कुओं में तेल मिलता है। हर कुएँ की ड्रिलिंग पर 1000 करोड़ रुपये तक खर्च आता है। यह खर्च कंपनियाँ तभी करती हैं जब तेल मिलने की गारंटी हो।
वजह 2: खोज का काम बहुत कम हुआ
भारत में सिर्फ 23 फीसदी ऐसे इलाकों की गहराई से खोज हुई है जहाँ तेल होने की संभावना है। बाकी 77 फीसदी इलाके में अभी तक ठीक से खोज ही नहीं हुई है।
जानकारों के मुताबिक, पिछली सरकारों के समय में तेल की खोज का काम लगभग बंद कर दिया गया था। पिछले कुछ सालों में ही फिर से यह काम शुरू हुआ है।
वजह 3: ड्रिलिंग के लिए जरूरी खनिज की कमी
यह एक बहुत ही कम चर्चा में आने वाली लेकिन बेहद अहम वजह है। तेल की ड्रिलिंग के लिए एक खास खनिज चाहिए होता है जो तेल के कुओं को स्थिर रखने के लिए जरूरी है।
भारत का 95 फीसदी यह खनिज आंध्र प्रदेश के एक माइन से निकलता है। लेकिन यहाँ के भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 सालों में यह भंडार आधे से ज्यादा कम हो गया है।
अगर यह खनिज खत्म हो गया, तो नए तेल के कुओं की ड्रिलिंग ही नहीं हो पाएगी। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इस खनिज को “राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला” बता रहे हैं।
वजह 4: खपत बहुत तेजी से बढ़ रही है
भारत में तेल की खपत हर साल बढ़ रही है। पिछले साल पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खपत 2.4 करोड़ टन थी। अनुमान है कि आने वाले 10-12 सालों में भारत की तेल की मांग और बढ़ जाएगी।
यानी हम जितना तेल निकाल रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा तेजी से खपत बढ़ रही है। इसलिए आयात पर निर्भरता बढ़ती ही जा रही है – 2014-15 में 84 फीसदी थी, अब 90 फीसदी हो गई।
वजह 5: पुराने क्षेत्रों में उत्पादन घट रहा है
मुंबई के पास समुद्र में जो पुराने तेल क्षेत्र हैं, वहाँ अब उत्पादन लगातार घट रहा है। नए क्षेत्रों की खोज और विकास में समय लगता है। तेल का कुआँ लगाने से लेकर उत्पादन शुरू होने में 10-15 साल लग सकते हैं।
अध्याय 3: अंडमान और कृष्णा-गोदावरी बेसिन – नई उम्मीद की किरण
हाल के सालों में भारत सरकार ने अंडमान बेसिन और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में तेल की खोज पर जोर देना शुरू किया है।
अंडमान में क्या हुआ:
- सरकारी तेल कंपनियों ने अंडमान में कुछ कुओं में गैस मिलने की पुष्टि की है।
- दूसरी सरकारी कंपनी ने भी गहरे पानी में ड्रिलिंग शुरू की है और हाइड्रोकार्बन के संकेत मिले हैं।
लेकिन चुनौतियाँ भी बड़ी हैं:
- अंडमान में अभी कोई पाइपलाइन नहीं है, कोई प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है।
- अगर तेल मिला भी, तो उसे बाहर लाने के लिए अरबों रुपये का ढाँचा बनाना होगा।
- जानकारों के मुताबिक, “अंडमान में बड़े स्तर पर खोज के लिए धैर्य और लंबी अवधि के निवेश की जरूरत है”।
अध्याय 4: अब तेल निकालने के लिए क्या कर रही है सरकार?
सरकार अब तेल की खोज को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है:
1. नई नीति
पिछले कुछ सालों में नई नीति लागू की गई है। इसके तहत कंपनियाँ खुद बता सकती हैं कि वे कहाँ तेल की खोज करना चाहती हैं। पहले सरकार तय करती थी कि कहाँ ड्रिलिंग होगी।
2. समुद्र में खोज योजना
सरकार ने समुद्र में तेल खोजने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है, जिसके तहत हर साल 150 तेल कुओं की ड्रिलिंग का लक्ष्य रखा गया है।
3. नया रेवेन्यू मॉडल
पहले कंपनियों को लागत निकालने के बाद मुनाफा मिलता था। अब नया मॉडल लागू किया गया है, जिससे कंपनियों को निवेश करने के लिए ज्यादा प्रोत्साहन मिलता है।
अध्याय 5: क्या भविष्य में बदलाव आएगा? – संभावनाएँ
संभावना 1: आयात पर निर्भरता कम होगी? – मुश्किल
जानकारों का मानना है कि आने वाले 10 सालों में भारत की तेल की खपत बढ़ती रहेगी। घरेलू उत्पादन भले ही बढ़े, लेकिन खपत से कम रहेगा। इसलिए आयात पर निर्भरता 85-90 फीसदी पर बनी रह सकती है।
संभावना 2: अंडमान में बड़ी खोज हो सकती है
अगर अंडमान या कृष्णा-गोदावरी बेसिन में बड़े स्तर पर तेल मिलता है, तो यह भारत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। लेकिन इसके लिए और निवेश और समय चाहिए।
संभावना 3: नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहन, एथेनॉल मिलावट, और सोलर-हवा ऊर्जा पर जोर दे रही है। एथेनॉल मिलावट का लक्ष्य बढ़ा दिया गया है। इससे तेल की खपत कम करने में मदद मिलेगी।
संभावना 4: आयात के स्रोत बढ़ाना
भारत अब तेल आयात के स्रोत बढ़ा रहा है। पहले सिर्फ 27 देशों से तेल आता था, अब 40 देशों से आयात हो रहा है। रूस, अमेरिका, सऊदी अरब, इराक, यूएई, और अफ्रीकी देशों से तेल मंगाया जा रहा है।
निष्कर्ष: तेल है, लेकिन निकालना मुश्किल
भारत में तेल के भंडार हैं – यह सच है। लेकिन यह भी सच है कि:
- यह तेल समुद्र की गहराई में है, जहाँ से निकालना महंगा है
- खोज का काम पिछले कई सालों से कम हुआ
- खपत उत्पादन से 8-9 गुना ज्यादा है
- ड्रिलिंग के लिए जरूरी खनिज खत्म हो रहा है
इसलिए भारत को अपनी 90 फीसदी जरूरत के लिए तेल आयात करना पड़ता है। अब सरकार ने अंडमान और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में नई खोज शुरू की है, लेकिन इसमें सालों लग सकते हैं।
एक बात तो तय है – जब तक कोई बड़ी खोज नहीं होती या तेल की खपत कम नहीं होती, तब तक भारत का तेल आयात जारी रहेगा।
लेखक: इन्फोविजन मीडिया इकोनॉमी डेस्क
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