हार्ट के डॉक्टर ऐसे लूट मचाते हैं! 99% भारतीयों को पता भी नहीं – इस जाल में कभी न फंसे, वरना लुट जाएगा परिवार
एंजियोप्लास्टी, बाईपास, स्टेंट – कब जरूरी है और कब डॉक्टरों का खेल? पहचानें 5 बड़े संकेत जो बचा सकते हैं आपका पैसा और जान
नई दिल्ली: दिल की बीमारी आज के समय में हर घर की समस्या बन गई है। जब किसी को हार्ट अटैक आता है या सीने में दर्द होता है, तो परिवार वाले बिना कुछ सोचे-समझे तुरंत डॉक्टर के पास भागते हैं। डॉक्टर जो कहते हैं, वही सही मान लिया जाता है। एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, बाईपास सर्जरी – ये सब नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं और जो भी कहा जाए, करा लेते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हार्ट के डॉक्टरों का एक बड़ा तबका इसी डर और जानकारी की कमी का फायदा उठाकर मरीजों को अनजाने में लाखों रुपये का चूना लगा रहा है?
हर साल हजारों मरीज ऐसी सर्जरी करा लेते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। स्टेंट लगा दिए जाते हैं जिनकी जरूरत नहीं होती। बाईपास सर्जरी कर दी जाती है जो टाली जा सकती थी। और सबसे बड़ी बात – 99% भारतीयों को यह पता ही नहीं होता कि वे इस जाल में फंस रहे हैं।
आज हम आपको बताएंगे – हार्ट के डॉक्टर कैसे लूट मचाते हैं, कौन-कौन से तरीके अपनाते हैं, और आप कैसे इस जाल में फंसने से बच सकते हैं।
अध्याय 1: सबसे बड़ा जाल – अनजाने में एंजियोग्राफी और स्टेंट
क्या है एंजियोग्राफी?
एंजियोग्राफी एक टेस्ट है जिसमें डॉक्टर दिल की नसों (आर्टरी) में डाई डालकर देखते हैं कि कहीं कोई ब्लॉकेज तो नहीं है। यह टेस्ट तब किया जाता है जब मरीज को हार्ट अटैक आया हो या फिर सीने में तेज दर्द हो।
कहाँ होता है जाल?
समस्या तब शुरू होती है जब डॉक्टर एंजियोग्राफी करने के बाद हर ब्लॉकेज पर तुरंत स्टेंट लगाने की सलाह देते हैं। यहाँ तक कि जब ब्लॉकेज 50-60 फीसदी होता है, तब भी स्टेंट लगा दिया जाता है।
क्या कहते हैं मेडिकल गाइडलाइन्स?
दुनिया भर के मेडिकल गाइडलाइन्स के मुताबिक:
- 70 फीसदी से कम ब्लॉकेज पर स्टेंट की जरूरत नहीं होती। इसे दवा और लाइफस्टाइल बदलकर कंट्रोल किया जा सकता है।
- 70 फीसदी से ज्यादा ब्लॉकेज पर ही स्टेंट की सिफारिश की जाती है।
लेकिन कई डॉक्टर 40-50 फीसदी के ब्लॉकेज पर भी स्टेंट लगा देते हैं। इसका कारण? एक स्टेंट लगाने पर डॉक्टर को 20,000 से 50,000 रुपये तक का कमीशन मिलता है। अस्पताल का बिल भी 1-2 लाख रुपये बढ़ जाता है।
अध्याय 2: बाईपास सर्जरी – कब जरूरी है और कब नहीं?
क्या है बाईपास सर्जरी?
बाईपास सर्जरी में दिल की बंद नसों के लिए नई नस (आमतौर पर पैर की नस) लगाई जाती है ताकि खून का रास्ता बदल दिया जाए। यह एक बड़ी सर्जरी है और इसमें कई दिन अस्पताल में रहना पड़ता है।
कब करनी चाहिए बाईपास?
बाईपास सर्जरी आमतौर पर तब की जाती है जब:
- दिल की कई नसों में 70 फीसदी से ज्यादा ब्लॉकेज हो
- मरीज को डायबिटीज हो और ब्लॉकेज ज्यादा हो
- एंजियोप्लास्टी (स्टेंट) से काम न बनता हो
कहाँ होता है जाल?
कई डॉक्टर ऐसे मरीजों को भी बाईपास की सलाह दे देते हैं जिनका काम एंजियोप्लास्टी से हो सकता है। बाईपास सर्जरी पर 3-5 लाख रुपये का बिल आता है, जबकि एंजियोप्लास्टी से 1-2 लाख में काम हो जाता। डॉक्टर और अस्पताल दोनों को बाईपास में ज्यादा फायदा होता है।
एक सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक:
“बाईपास सर्जरी बहुत बड़ा फैसला है। अगर कोई डॉक्टर तुरंत बाईपास की सलाह दे रहा है, तो दूसरी राय जरूर लें। 50% मामलों में बाईपास की जरूरत नहीं होती।”
अध्याय 3: टेस्ट का खेल – जरूरत से ज्यादा टेस्ट कराना
हार्ट के डॉक्टरों का एक और बड़ा हथियार है – जरूरत से ज्यादा टेस्ट कराना। ये टेस्ट मरीज के बिल को कई गुना बढ़ा देते हैं।
कौन-कौन से टेस्ट होते हैं?
| टेस्ट | सामान्य कीमत | कब जरूरी है |
|---|---|---|
| TMT (Treadmill Test) | 1000-2000 रुपये | पहला टेस्ट – बेसिक जांच के लिए |
| 2D Echo | 1500-2500 रुपये | दिल के आकार और पंपिंग देखने के लिए |
| CT Angiography | 10,000-15,000 रुपये | बिना कैथेटर के नसें देखने के लिए |
| Angiography | 15,000-25,000 रुपये | कैथेटर डालकर नसें देखना – आखिरी टेस्ट |
कहाँ होता है जाल?
कई डॉक्टर सीधे CT Angiography या Angiography करा लेते हैं, जबकि मरीज का काम TMT और 2D Echo से भी हो सकता था। खासकर जब मरीज के पास कोई गंभीर लक्षण न हो, तो ये बड़े टेस्ट जरूरी नहीं होते।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर मरीज को सीने में दर्द नहीं है, ECG नॉर्मल है, और TMT में कोई बड़ी समस्या नहीं है, तो Angiography कराने की जरूरत नहीं है। फिर भी कई डॉक्टर “प्रॉफिट” के लिए यह टेस्ट करा लेते हैं।
अध्याय 4: बंधक बना लिया जाता है मरीज को – डर और भावनाओं का खेल
हार्ट के डॉक्टरों का सबसे बड़ा हथियार है मरीज और परिवार का डर। जैसे ही “हार्ट” या “बाईपास” शब्द सुनते हैं, परिवार वाले डर जाते हैं। डॉक्टर इसी डर का फायदा उठाते हैं।
कैसे फंसाते हैं?
- जल्दबाजी दिखाना: डॉक्टर कहते हैं – “अभी नहीं किया तो कल हार्ट अटैक आ सकता है।” यह डर दिखाकर मरीज को तुरंत सर्जरी के लिए राजी कर लिया जाता है।
- दूसरी राय लेने से मना करना: कई डॉक्टर कहते हैं – “दूसरी राय लेने में वक्त बर्बाद होगा, तब तक बहुत देर हो जाएगी।” यह पूरी तरह गलत है। दूसरी राय लेने में 2-3 दिन लगते हैं, जो ब्लॉकेज बढ़ने के लिए काफी नहीं है।
- गंभीर बीमारी बताना: कभी-कभी डॉक्टर सामान्य ब्लॉकेज को भी “गंभीर” बता देते हैं, जबकि असल में वह दवा से ठीक हो सकता है।
- एक ही अस्पताल से जुड़े डॉक्टर: कई डॉक्टर एक ही अस्पताल से जुड़े होते हैं और मरीज को दूसरे डॉक्टर के पास जाने से मना करते हैं। वे कहते हैं कि “हमारी टीम ही सबसे अच्छी है।”
अध्याय 5: कमीशन का खेल – स्टेंट कंपनियों से लेकर अस्पताल तक
हार्ट के डॉक्टरों के इस जाल की सबसे बड़ी वजह है – कमीशन और किकबैक।
कहाँ-कहाँ से मिलता है कमीशन?
- स्टेंट कंपनियों से: एक स्टेंट पर डॉक्टर को 20,000 से 50,000 रुपये तक का कमीशन मिलता है। जितने ज्यादा स्टेंट लगाएंगे, उतना ज्यादा कमीशन।
- अस्पताल से: कई अस्पताल डॉक्टरों को मरीज लाने पर कमीशन देते हैं। एक एंजियोप्लास्टी पर 30-40 फीसदी तक कमीशन मिल जाता है।
- केबिन और बेड से: जितने दिन मरीज अस्पताल में रहेगा, उतने दिन का कमीशन डॉक्टर को मिलता है। इसलिए कई डॉक्टर मरीज को जरूरत से ज्यादा दिन अस्पताल में रखते हैं।
यह कानूनी है क्या?
नहीं। यह पूरी तरह गैरकानूनी है। भारत मेडिकल काउंसिल के नियमों के मुताबिक, डॉक्टरों को कोई भी कमीशन लेना मना है। लेकिन यह खेल चुपके-चुपके चलता रहता है।
अध्याय 6: कैसे बचें इस जाल से? – 5 जरूरी टिप्स
अगर आप या आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी हुई है, तो ये 5 टिप्स आपको डॉक्टरों के जाल में फंसने से बचा सकते हैं।
टिप 1: दूसरी राय जरूर लें
यह सबसे जरूरी नियम है। अगर कोई डॉक्टर एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, या बाईपास की सलाह दे रहा है, तो कम से कम एक दूसरे डॉक्टर से राय जरूर लें। दूसरी राय लेने में कोई शर्म नहीं है। अच्छे डॉक्टर खुद भी दूसरी राय लेने की सलाह देते हैं।
टिप 2: ब्लॉकेज का प्रतिशत पूछें
डॉक्टर से साफ-साफ पूछें – “ब्लॉकेज कितने प्रतिशत है?” अगर ब्लॉकेज 70 फीसदी से कम है, तो स्टेंट या बाईपास की जरूरत नहीं है। इसे दवा और लाइफस्टाइल बदलकर कंट्रोल किया जा सकता है।
टिप 3: सर्जरी में जल्दबाजी न करें
अगर डॉक्टर कह रहा है कि “तुरंत सर्जरी करनी है, वरना हार्ट अटैक आ जाएगा”, तो घबराएँ नहीं। यह अक्सर डर दिखाने का तरीका होता है। ज्यादातर मामलों में 2-3 दिन सोचने का समय होता है।
टिप 4: सरकारी अस्पताल की राय लें
अगर संभव हो तो किसी बड़े सरकारी अस्पताल (AIIMS, PGI, RML) में जाकर राय लें। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को कमीशन का कोई फायदा नहीं होता, इसलिए वे ज्यादा ईमानदारी से सलाह देते हैं।
टिप 5: स्टेंट और बाईपास के विकल्प पूछें
डॉक्टर से पूछें – “क्या यह सर्जरी दवा से टाली जा सकती है?” अगर डॉक्टर कहता है कि “हाँ, थोड़े समय के लिए टाल सकते हैं”, तो समझ जाइए कि उसकी जरूरत तुरंत नहीं है।
अध्याय 7: कुछ ऐसे केस जो आपको हैरान कर देंगे
केस 1: 40% ब्लॉकेज पर स्टेंट
दिल्ली के एक 55 साल के मरीज को सीने में हल्का दर्द हुआ। डॉक्टर ने एंजियोग्राफी कराई। रिपोर्ट में 40% ब्लॉकेज था। फिर भी डॉक्टर ने स्टेंट लगाने की सलाह दी। मरीज ने दूसरी राय ली। दूसरे डॉक्टर ने बताया कि 40% ब्लॉकेज पर स्टेंट की जरूरत नहीं है, दवा से काम हो जाएगा। मरीज ने 2 लाख रुपये बचाए।
केस 2: बाईपास की जगह एंजियोप्लास्टी
मुंबई के एक 60 साल के मरीज को एक डॉक्टर ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी। मरीज ने दूसरी राय ली। दूसरे डॉक्टर ने बताया कि उनकी स्थिति में एंजियोप्लास्टी से काम हो सकता है। उनका 5 लाख रुपये का बिल घटकर 1.5 लाख रुपये हो गया।
केस 3: जरूरत न होने पर भी अस्पताल में रखा
लखनऊ के एक मरीज को सिर्फ TMT कराने के लिए अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने उन्हें 3 दिन अस्पताल में रखा, 5 टेस्ट कराए, और 50,000 रुपये का बिल दे दिया। दूसरे डॉक्टर ने बताया कि TMT के बिना भी उन्हें कोई समस्या नहीं थी।
निष्कर्ष: डरें नहीं, समझदारी से लें फैसला
हार्ट की बीमारी गंभीर है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डॉक्टर जो कहे, वही सही मान लें। हर साल हजारों मरीज ऐसी सर्जरी करा लेते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। लाखों रुपये का बिल चुकाते हैं। कुछ मामलों में सर्जरी के साइड इफेक्ट्स से भी जान जोखिम में पड़ती है।
याद रखें:
- 70% से कम ब्लॉकेज पर स्टेंट की जरूरत नहीं
- दूसरी राय लेने में कोई शर्म नहीं
- जल्दबाजी में सर्जरी न कराएँ
- सरकारी अस्पताल की राय जरूर लें
- डॉक्टर से कमीशन और स्टेंट के विकल्प पूछें
हार्ट के डॉक्टरों का यह जाल तभी काम करता है जब मरीज और परिवार डर जाते हैं और सवाल पूछना भूल जाते हैं। अगर आप सवाल पूछेंगे, तो डॉक्टर को एहसास होगा कि यह मरीज समझदार है। और वह अनजाने में सर्जरी की सलाह देने से बचेगा।
आपका पैसा, आपकी जान, और आपका परिवार – सबसे जरूरी है। डरें नहीं, समझदारी से फैसला लें।
लेखक: इन्फोविजन मीडिया हेल्थ डेस्क
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