नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ सीमाओं पर ही संघर्ष नहीं होता, बल्कि एक अदृश्य जंग भी लगातार जारी रहती है – जासूसी और गुप्त अभियानों की जंग। इस जंग के दो सबसे बड़े योद्धा हैं – भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI)।
दोनों एजेंसियां अपने-अपने देशों की सुरक्षा के लिए काम करती हैं, लेकिन इनकी कार्यशैली, संरचना और उद्देश्यों में बड़ा अंतर है। यह लेख इन दोनों खुफिया एजेंसियों की तुलनात्मक समीक्षा करता है – उनकी स्थापना, काम करने के तरीके, बड़ी सफलताएं, हालिया घटनाक्रम और आने वाली चुनौतियां।
1. स्थापना और इतिहास: कब और क्यों हुआ जन्म?
RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग)
- स्थापना: 1968 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में।
- पृष्ठभूमि: 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खुफिया जानकारी की कमी महसूस होने के बाद एक अलग विदेशी खुफिया एजेंसी की आवश्यकता हुई।
- उद्देश्य: विदेशी खुफिया जानकारी एकत्र करना, आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग, परमाणु प्रसार रोकना, और भारत की विदेश नीति को रणनीतिक समर्थन देना।
ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस)
- स्थापना: 1948 में पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के कार्यकाल के दौरान।
- पृष्ठभूमि: भारत के साथ 1947-48 के युद्ध के बाद सेना को खुफिया समर्थन की आवश्यकता से गठन।
- उद्देश्य: पाकिस्तानी सेना को खुफिया जानकारी उपलब्ध कराना और विदेशी तथा आंतरिक खतरों से बचाव करना।
2. संरचना और कार्यप्रणाली: कैसे काम करती हैं ये एजेंसियां?
| पहलू | RAW | ISI |
|---|---|---|
| नियंत्रण | सीधे प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को रिपोर्ट करती है | पाकिस्तानी सेना के अधीन, सीधे सेनाध्यक्ष को रिपोर्ट करती है |
| प्रमुख की नियुक्ति | कोई भी वरिष्ठ अधिकारी (सिविलियन या सैन्य पृष्ठभूमि से) | केवल सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल |
| कार्यक्षेत्र | केवल विदेशी गतिविधियों पर केंद्रित, देश के अंदर संचालन नहीं करती | विदेशी और आंतरिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय |
| गिरफ्तारी का अधिकार | नहीं | हां (पाकिस्तान के अंदर) |
| सार्वजनिक छवि | स्वतंत्र, पेशेवर एजेंसी मानी जाती है | पाकिस्तान में “छाया सरकार” के रूप में जानी जाती है |
RAW को किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है और यह देश के अंदर जासूसी नहीं करती – ये कार्य ISI के दायरे में आते हैं। वहीं, ISI को अक्सर पाकिस्तान की “छाया सरकार” कहा जाता है क्योंकि इसका प्रभाव राजनीति, सेना और समाज हर क्षेत्र में देखा जाता है।
3. बड़ी सफलताएं और उपलब्धियां
RAW की बड़ी सफलताएं:
- 1971 का युद्ध: RAW ने पूर्वी पाकिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी ने वहां के लड़ाकों को प्रशिक्षण और रणनीतिक सहायता प्रदान की।
- परमाणु निगरानी: RAW ने पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के परमाणु कार्यक्रमों पर लगातार नजर रखी है।
- भारत विरोधी तत्वों पर नजर: पूर्वोत्तर और अन्य क्षेत्रों में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों पर निगरानी और आवश्यक हस्तक्षेप।
ISI की बड़ी सफलताएं:
- अफगानिस्तान में मुजाहिदीन को समर्थन (1980 का दशक): कई विदेशी सहयोगियों के साथ मिलकर सोवियत सेना के खिलाफ वहां के लड़ाकों को प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराए।
- बड़ी साजिशों का खुलासा: ISI ने समय-समय पर पाकिस्तान के अंदर बड़े विस्फोटकों से भरे वाहनों को पकड़ने का दावा किया है, जिन्हें भारत से संचालित साजिश बताया गया।
4. हालिया घटनाक्रम और विवाद (2025-2026)
पहलगाम मामले की चर्चा
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, एक लीक दस्तावेज में RAW पर पहलगाम में एक विशेष अभियान की योजना बनाने का आरोप लगाया गया। इस योजना में मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान के खिलाफ माहौल बनाने, समयसीमा को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की यात्रा के अनुसार तय करने, और कृत्रिम मेधा (AI) के उपयोग से फर्जी सबूत तैयार करने की बात कही गई थी। हालांकि, भारतीय मीडिया द्वारा तत्काल रिपोर्टिंग करने के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी।
पत्रकारों को एजेंट बताने का विवाद
जनवरी 2026 में पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता ने एक संवाददाता सम्मेलन में दो भारतीय पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को RAW से जुड़ा हुआ बताया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
अमेरिकी आयोग की सिफारिश
मार्च 2026 में एक अमेरिकी आयोग ने RAW पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की। इस पर भारत ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका को पहले अपने यहां धार्मिक स्थलों पर होने वाले हमलों पर ध्यान देना चाहिए।
5. वैश्विक मंच पर RAW पर आरोप
पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने RAW पर विदेशी धरती पर अवैध कार्रवाइयों का आरोप लगाया है:
| देश | आरोप का सारांश | समयावधि |
|---|---|---|
| ऑस्ट्रेलिया | रक्षा परियोजनाओं की जानकारी चुराने का आरोप | 2020 के दशक |
| कनाडा | एक नागरिक की हत्या में संलिप्तता का आरोप | 2023 |
| अमेरिका | एक अलगाववादी नेता की हत्या की साजिश का आरोप | 2023 |
| श्रीलंका | एक विद्रोही संगठन को प्रशिक्षण और हथियार देने का आरोप | 1980-90 का दशक |
| नेपाल | आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप का आरोप | 2020 के दशक |
6. कौन है ज्यादा प्रभावी?
एक पूर्व RAW प्रमुख के अनुसार, RAW एक “काफी अच्छी” एजेंसी है जो कई मामलों में ISI से बेहतर प्रदर्शन करती है। हालांकि, यह तुलना इस बात पर भी निर्भर करती है कि किस मापदंड पर देखा जाए:
- तकनीकी क्षमता: RAW के पास बेहतर तकनीकी संसाधन और वैश्विक नेटवर्क माना जाता है।
- राजनीतिक नियंत्रण: RAW सीधे निर्वाचित प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है, जबकि ISI सेना के अधीन है।
- कार्यक्षेत्र का विस्तार: ISI का दायरा अधिक व्यापक है (आंतरिक + बाहरी दोनों), जबकि RAW केवल बाहरी खुफिया पर केंद्रित है।
- अंतरराष्ट्रीय छवि: RAW पर हाल के वर्षों में कई देशों ने विवादास्पद गतिविधियों का आरोप लगाया है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर असर पड़ा है।
इन्फोविजन मीडिया का विश्लेषण: आगे की चुनौतियां
RAW और ISI के बीच यह जासूसी संघर्ष अब नए युग में प्रवेश कर चुका है:
- साइबर युद्ध: अब जासूसी सिर्फ भौतिक दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर हमले, डेटा हैकिंग और डिजिटल प्रचार का दौर है।
- नई तकनीकों का उपयोग: दोनों एजेंसियां अब ड्रोन, उपग्रह और कृत्रिम मेधा (AI) का इस्तेमाल कर रही हैं।
- वैश्विक निगरानी: अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में RAW और ISI दोनों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
निष्कर्ष: RAW और ISI के बीच की यह जंग रुकने वाली नहीं है। दोनों एजेंसियों की अपनी ताकत और कमजोरियां हैं। लेकिन इतना तय है कि 21वीं सदी में यह संघर्ष और तेज होगा – और इसका प्रभाव पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा।
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