नई दिल्ली: क्या आपने कभी किसी को नींद में बात करते हुए सुना है या खुद बिस्तर छोड़कर चलते हुए पाया है? अक्सर घरों में इसे ‘भूत-प्रेत’ का असर या मानसिक कमजोरी समझ लिया जाता है, लेकिन विज्ञान की नजर में यह एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। आइए, इस लेख में हम गहराई से जानते हैं कि आखिर नींद में बोलना या चलना आखिर क्या है, क्या यह वाकई कोई बीमारी है, और इससे बचाव के क्या उपाय हैं।
क्या यह कोई बीमारी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, नींद में बोलना (Sleep Talking) और नींद में चलना (Sleep Walking) को मेडिकल भाषा में ‘पैरासोम्निया’ (Parasomnia) की श्रेणी में रखा जाता है। यह कोई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि एक नींद विकार (Sleep Disorder) है, जो तब होता है जब व्यक्ति की नींद के चक्र में गड़बड़ी आ जाती है। यह स्थिति आमतौर पर गहरी नींद (NREM) के दौरान उत्पन्न होती है, जब मस्तिष्क का वह हिस्सा जो शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है, सक्रिय हो जाता है, जबकि व्यक्ति अभी भी नींद की अवस्था में होता है।
नींद में चलने और बोलने के प्रमुख कारण
डॉक्टरों की मानें तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। यह समस्या केवल बच्चों में ही नहीं, बल्कि बड़ों में भी देखने को मिलती है। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- आनुवंशिकता: यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
- नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या: रात में देर से सोना, नींद पूरी न होना या शिफ्ट ड्यूटी (रात्रि पाली में काम) करने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- तनाव और चिंता: मानसिक तनाव, एंग्जाइटी या डिप्रेशन इस समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं।
- बुखार या अन्य बीमारियाँ: तेज बुखार, स्लीप एपनिया (सांस रुकना) या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी शारीरिक समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं।
- शराब और दवाओं का सेवन: सोने से पहले शराब पीना या कुछ विशेष प्रकार की नींद की गोलियों का सेवन इस विकार को बढ़ावा देता है।
क्या यह खतरनाक हो सकता है?
[यहां मूल कॉपीराइट सामग्री वाला पैराग्राफ था, जिसे पूरी तरह बदलकर मौलिक विश्लेषण प्रस्तुत किया जा रहा है।]
आमतौर पर नींद में बोलना हानिरहित माना जाता है, लेकिन नींद में चलना गंभीर चोट का कारण बन सकता है। मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित केस स्टडीज बताती हैं कि कई बार व्यक्ति नींद में सीढ़ियों से गिर सकता है, खिड़की से बाहर निकल सकता है या गाड़ी चलाने की कोशिश भी कर सकता है। खतरे की बात यह है कि इस दौरान व्यक्ति की प्रतिक्रिया क्षमता शून्य होती है और उसे अपने किए की कोई जानकारी नहीं होती। इसलिए, इसे केवल ‘आदत’ या ‘हल्की समस्या’ नजरअंदाज करना सुरक्षित नहीं है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे स्लीप स्पेशलिस्ट (नींद रोग विशेषज्ञ) से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है।
बचाव और उपचार के तरीके
यदि आप या आपके घर में किसी को यह समस्या है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसे सही जीवनशैली और चिकित्सीय सलाह से नियंत्रित किया जा सकता है:
- सुरक्षित वातावान: नींद में चलने वाले व्यक्ति के कमरे से नुकीली वस्तुएं हटा दें, सीढ़ियों पर गेट लगा दें और खिड़कियां बंद रखें।
- नींद की दिनचर्या सुधारें: हर रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से दूरी बनाएं।
- तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान और हल्के व्यायाम से मानसिक शांति मिलती है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- चिकित्सकीय परामर्श: यदि समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर ‘पॉलीसोम्नोग्राफी’ (Sleep Study) टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। यह टेस्ट नींद के दौरान मस्तिष्क की तरंगों, हृदय गति और सांस की गतिविधियों की मॉनिटरिंग करता है।
निष्कर्ष
नींद में बोलना या चलना कोई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि एक न्यूरोलॉजिकल स्लीप डिसऑर्डर है। इसे सही जानकारी, सकारात्मक जीवनशैली और समय पर इलाज के जरिए प्रबंधित किया जा सकता है। यदि यह समस्या आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है या शारीरिक जोखिम पैदा कर रही है, तो बिना देरी किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के निदान और उपचार के लिए हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लें।
