एक ही प्रदेश, दो अलग दुनिया: पश्चिमी UP में फैक्ट्रियाँ, पूर्वी UP में बेरोजगारी – कहाँ हुई चूक?
गंगा के दोनों किनारों का सफर: एक तरफ गुरुग्राम-नोएडा, दूसरी तरफ गोरखपुर-बलिया – जानिए कैसे बनी यह असमानता
लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश – भारत का सबसे बड़ा राज्य। यहाँ की आबादी 24 करोड़ से ज्यादा है, जो कई देशों से भी ज्यादा है। लेकिन इस विशाल प्रदेश की सबसे बड़ी पहेली यह है कि यहाँ का पश्चिमी हिस्सा अमीर है और पूर्वी हिस्सा गरीब ।
पश्चिमी UP में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ जैसे शहर हैं – जहाँ ऊँची-ऊँची बिल्डिंग, मॉल, फैक्ट्रियाँ और लाखों लोगों को रोजगार है। वहीं पूर्वी UP में गोरखपुर, बलिया, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी जैसे जिले हैं – जहाँ आज भी लाखों लोग रोजी-रोटी के लिए मुंबई, दिल्ली, सूरत जैसे शहरों की ओर पलायन करते हैं ।
आखिर एक ही राज्य के दो हिस्सों में इतना बड़ा फर्क क्यों है? आइए समझते हैं इस सवाल की पूरी कहानी – इतिहास से लेकर आज तक।
अध्याय 1: पश्चिमी UP और पूर्वी UP में कितना फर्क? – आंकड़ों में तस्वीर
पहले देख लेते हैं कि दोनों हिस्सों में कितना बड़ा फर्क है:
| पैमाना | पश्चिमी UP | पूर्वी UP |
|---|---|---|
| प्रति व्यक्ति आय | करीब 1.5 लाख रुपये सालाना | करीब 65 हजार रुपये सालाना |
| उद्योगों की संख्या | हजारों बड़े-छोटे उद्योग | बहुत कम, ज्यादातर कृषि पर निर्भर |
| रोजगार | फैक्ट्रियाँ, IT, सर्विस सेक्टर | कृषि, मजदूरी, पलायन |
| बुनियादी ढांचा | अच्छी सड़कें, मेट्रो, एयरपोर्ट | पिछड़ा हुआ, सड़कें कमजोर |
| शिक्षा दर | 75-80% | 65-70% |
यह आंकड़े बताते हैं कि दोनों हिस्सों की तस्वीर बिल्कुल अलग है।
अध्याय 2: इतिहास – जब पूर्वी UP था कभी अमीर
कुछ लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि पूर्वी UP कभी बहुत अमीर हुआ करता था ।
पुराने जमाने का गौरव
- गंगा के किनारे बसे शहर – वाराणसी, इलाहाबाद (अब प्रयागराज), गाजीपुर, बलिया – ये सभी व्यापार और संस्कृति के बड़े केंद्र हुआ करते थे ।
- रेशम उद्योग – पूर्वी UP का रेशम (बनारसी साड़ी, गाजीपुर का रेशम) दुनियाभर में मशहूर था ।
- नदी व्यापार – गंगा नदी के रास्ते व्यापार होता था, जो पूर्वी UP को बंगाल और बिहार से जोड़ता था ।
ब्रिटिश काल में आया बदलाव
अंग्रेजों ने जब भारत पर राज किया, तो उन्होंने व्यापार के रास्ते बदल दिए । नदियों के जरिए व्यापार कम हुआ और रेलवे, बंदरगाहों के जरिए व्यापार बढ़ा । पूर्वी UP के नदी व्यापार को बड़ा झटका लगा ।
साथ ही, अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन (1905) और फिर बिहार को अलग करने (1912) जैसे फैसले किए, जिससे पूर्वी UP की अर्थव्यवस्था और कमजोर हुई ।
अध्याय 3: पश्चिमी UP कैसे बना अमीर?
पश्चिमी UP के विकास की कहानी 1970-80 के दशक से शुरू होती है।
दिल्ली का करीब होना – सबसे बड़ा फायदा
पश्चिमी UP की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह दिल्ली के बिल्कुल करीब है। दिल्ली देश की राजधानी है, यहाँ सारे मंत्रालय, दूतावास, बड़ी कंपनियाँ हैं। पश्चिमी UP के शहर – गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा – दिल्ली से सटे हुए हैं। इसलिए यहाँ उद्योग, व्यापार और रोजगार के ढेरों मौके पैदा हुए।
1980-90 के दशक में हुआ बड़ा बदलाव
- 1986 – मरुधरा इंडस्ट्रियल एरिया: मेरठ और आसपास में छोटे-बड़े उद्योग लगने शुरू हुए ।
- 1990 का दशक – आर्थिक सुधार: जब देश में उद्योगों पर लगी पाबंदियाँ हटीं, तो पश्चिमी UP को सबसे ज्यादा फायदा हुआ ।
- नोएडा का विकास: 1976 में नोएडा बना, 1990 के दशक में IT कंपनियाँ आईं, और आज यह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बन चुका है ।
यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा
2000 के बाद यमुना एक्सप्रेसवे बना, जिसने दिल्ली से आगरा, मथुरा, और जेवर तक का सफर आसान कर दिया । इस रास्ते पर ग्रेटर नोएडा बसा, जहाँ हजारों फैक्ट्रियाँ, विश्वविद्यालय और सोसायटियाँ बनीं ।
अब जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का उद्घाटन हो चुका है, जिससे पश्चिमी UP और मजबूत होगा ।
अध्याय 4: पूर्वी UP क्यों पिछड़ा रहा?
अब सबसे बड़ा सवाल – अगर पश्चिमी UP इतनी तेजी से बढ़ा, तो पूर्वी UP क्यों पिछड़ा रहा? इसके पीछे 5 बड़ी वजहें हैं।
वजह 1: दिल्ली से दूरी
पूर्वी UP की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि यह राजधानी दिल्ली से बहुत दूर है। गोरखपुर से दिल्ली करीब 800 किलोमीटर है, बलिया से भी इतना ही। जब तक दिल्ली के करीब नहीं होगा, तब तक वहाँ उद्योग नहीं लगेंगे। उद्योगपति वहीं जाते हैं जहाँ बाजार करीब हो, रास्ते अच्छे हों, और खर्च कम हो।
वजह 2: उद्योगों की कमी
पश्चिमी UP में हजारों बड़े-छोटे उद्योग हैं – ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, फर्नीचर, खिलौने, और भी बहुत कुछ। पूर्वी UP में ऐसे उद्योग नहीं के बराबर हैं। यहाँ के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं। खेती में साल में सिर्फ 2-3 महीने काम होता है, बाकी समय लोग बेरोजगार रहते हैं।
वजह 3: पलायन की बुरी आदत
पूर्वी UP के लाखों लोग रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं – मुंबई, दिल्ली, सूरत, पुणे, बेंगलुरु। ये लोग वहाँ मजदूरी करते हैं, पैसे कमाते हैं, लेकिन अपने गाँव में कभी लौटकर कोई उद्योग नहीं लगाते। पैसा बाहर ही खर्च हो जाता है, अपने इलाके में निवेश नहीं होता। इससे यहाँ की अर्थव्यवस्था कभी मजबूत नहीं हो पाई।
वजह 4: बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएँ
पूर्वी UP के कई जिले – गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर – हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं। गंडक, घाघरा, राप्ती, गंगा जैसी नदियाँ हर साल तबाही मचाती हैं। जब हर साल खेती बर्बाद हो जाए, सड़कें टूट जाएँ, तो विकास कैसे होगा?
वजह 5: राजनीतिक उपेक्षा
पूर्वी UP पर राजनीति में कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। पश्चिमी UP में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएँ बनीं, लेकिन पूर्वी UP के लिए ऐसी कोई बड़ी परियोजना नहीं बनी। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे 2021 में बना, लेकिन यह अकेला काफी नहीं है। उद्योग लगाने के लिए निवेशक चाहिए, अच्छी नीतियाँ चाहिए – जो पूर्वी UP को नहीं मिलीं।
अध्याय 5: पूर्वी UP में अब क्या हो रहा है?
हाल के सालों में पूर्वी UP की तरफ थोड़ा ध्यान देना शुरू हुआ है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
यह 340 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे गाजीपुर को लखनऊ से जोड़ता है। इससे लखनऊ से पूर्वी UP का सफर 5-6 घंटे से घटकर 3-4 घंटे हो गया है । इसके किनारे अब औद्योगिक कॉरिडोर बनाने की योजना है।
गोरखपुर और वाराणसी में हवाई अड्डे
गोरखपुर में एयरपोर्ट पहले से था, अब वाराणसी में भी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। इससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।
मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटियाँ
पूर्वी UP में कई नए मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय खुले हैं – गोरखपुर, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर में। इससे शिक्षा के मौके बढ़े हैं, लेकिन रोजगार के मौके अब भी कम हैं।
पिछड़ा इलाका अनुदान (Bundelkhand Package)
पूर्वी UP के कुछ जिलों को पिछड़ा इलाका घोषित किया गया है, जिससे केंद्र सरकार से अलग से फंड मिलता है।
अध्याय 6: आगे क्या? – पूर्वी UP के विकास की राह
पूर्वी UP को पश्चिमी UP की तरह अमीर बनाने के लिए क्या करना होगा? आइए समझते हैं।
उद्योगों की जरूरत
पूर्वी UP को सबसे ज्यादा जरूरत है उद्योगों की। खेती से लोगों को पूरे साल का रोजगार नहीं मिल सकता। यहाँ कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, लेदर, हैंडलूम जैसे उद्योग लग सकते हैं। पूर्वी UP का रेशम, बनारसी साड़ी, और हस्तशिल्प पूरी दुनिया में मशहूर है – इसे बढ़ावा देने की जरूरत है।
बाढ़ पर स्थायी समाधान
बाढ़ को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। नदियों का जल निकासी ठीक करना, बाँध बनाना, और बाढ़ प्रबंधन को गंभीरता से लेना होगा। जब तक हर साल बाढ़ आती रहेगी, तब तक कोई उद्योगपति वहाँ निवेश नहीं करेगा।
नेपाल और बिहार से कनेक्टिविटी
पूर्वी UP नेपाल और बिहार के करीब है। यहाँ से नेपाल का व्यापार हो सकता है। सुनौली (महराजगंज) और रक्सौल (पूर्वी चंपारण) जैसे बॉर्डर पॉइंट्स को मजबूत किया जाए तो यह इलाका व्यापार का केंद्र बन सकता है।
निवेशकों को लुभाना
पश्चिमी UP में निवेशक खुद आए क्योंकि वह दिल्ली के करीब था। पूर्वी UP को निवेशकों को लुभाने के लिए खास पैकेज चाहिए – टैक्स में छूट, सस्ती बिजली, अच्छी सड़कें, और सरकारी सहूलियतें।
निष्कर्ष: अब समय आ गया है
पश्चिमी UP और पूर्वी UP के बीच का फर्क सिर्फ आर्थिक नहीं है – यह सामाजिक और सांस्कृतिक फर्क भी है। एक तरफ विकास की रफ्तार तेज है, दूसरी तरफ पलायन की पुरानी समस्या आज भी बनी हुई है।
पश्चिमी UP अमीर बन गया क्योंकि वहाँ दिल्ली जैसी राजधानी का साथ मिला, उद्योग लगे, और निवेश आया। पूर्वी UP पिछड़ा रहा क्योंकि वह दूर था, उद्योग नहीं लगे, बाढ़ ने तबाही मचाई, और पलायन ने यहाँ की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया।
अब पूर्वी UP की तरफ ध्यान देना शुरू हुआ है – पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बन गया है, एयरपोर्ट बढ़ रहे हैं, मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। उद्योग लगाना, बाढ़ पर काबू पाना, और पलायन को रोकना – ये तीनों काम हो गए तो पूर्वी UP भी पश्चिमी UP की तरह अमीर बन सकता है।
आखिर यह एक ही प्रदेश है – गंगा के इस पार हो या उस पार, हर हिस्से का विकास होना चाहिए।
लेखक: इन्फोविजन मीडिया डेस्क
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