नई दिल्ली, 22 मार्च 2026 – भारत की प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल के खिलाफ धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता के आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस मामले में दोनों संस्थापकों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की है ।
हालांकि, कॉइनडीसीएक्स ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि यह पहचान चोरी करने वाले ठगों की साजिश का परिणाम है। कंपनी ने दावा किया है कि धोखाधड़ी करने वालों ने उसके नाम पर नकली वेबसाइट बनाकर निवेशकों को ठगा है ।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंबरा थाना क्षेत्र में एक निवेशक द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान उसे क्रिप्टो निवेश और व्यापारिक साझेदारी के नाम पर 71 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ । शिकायत में यह भी कहा गया कि इस धोखाधड़ी में कॉइनडीसीएक्स के नाम और उसके संस्थापकों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया ।
शिकायत के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसमें कॉइनडीसीएक्स के दोनों सह-संस्थापक भी शामिल हैं। सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल को बेंगलुरु से हिरासत में लिया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 23 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया ।
कॉइनडीसीएक्स का पक्ष: पहचान चोरी कर रहे हैं ठग
कंपनी ने इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। कॉइनडीसीएक्स ने कहा कि दर्ज की गई प्राथमिकी निराधार है और यह उन लोगों की साजिश है जो कॉइनडीसीएक्स के संस्थापक बनकर आम जनता को ठग रहे हैं ।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में जिन तीसरे पक्ष के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाने की बात कही जा रही है, उनका उसके प्लेटफॉर्म से कोई संबंध नहीं है। कॉइनडीसीएक्स ने इसे ब्रांड की पहचान की चोरी का एक गंभीर मामला बताया है ।
कंपनी के बयान में कहा गया, “हमने इस तथ्य को संज्ञान में लिया है और अपनी वेबसाइट पर एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है कि कॉइनडीसीएक्स को ठगों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। ब्रांड की पहचान की चोरी और संबंधित साइबर धोखाधड़ी भारत के डिजिटल वित्त पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती चिंता का विषय है, और हम ऐसे कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं” ।
1,200 से अधिक नकली वेबसाइटों का हुआ खुलासा
कंपनी ने यह भी खुलासा किया है कि पिछले कुछ महीनों में उसने 1,200 से अधिक ऐसी फर्जी वेबसाइटों की पहचान की है, जो उसके आधिकारिक प्लेटफॉर्म की नकल कर रही थीं । इनमें से एक नकली वेबसाइट के जरिए ही शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी होने की बात सामने आई है ।
कंपनी ने कहा कि वह इस मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरी तरह से सहयोग कर रही है। कॉइनडीसीएक्स ने बताया कि पीड़ित ने एफआईआर दर्ज कराने से पहले कंपनी से संपर्क नहीं किया था, जिससे संस्थापकों को भी इस शिकायत से आश्चर्य हुआ ।
निवेशकों और उपयोगकर्ताओं के लिए सलाह
कॉइनडीसीएक्स ने इस घटना के बाद अपने उपयोगकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि निवेशक हमेशा आधिकारिक वेबसाइट और एप्लिकेशन का ही उपयोग करें। किसी भी अनजान स्रोत से आए निवेश संबंधी प्रस्तावों पर भरोसा न करें ।
यह पहली बार नहीं है जब कॉइनडीसीएक्स के नाम से फर्जी वेबसाइट या एप्लिकेशन सामने आए हों। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने भी कॉइनडीसीएक्स के नाम से चल रही फर्जी वेबसाइटों की जांच की थी, जिसमें कई निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई थी ।
कंपनी की हालिया स्थिति
गौरतलब है कि कॉइनडीसीएक्स को पहले भी साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पिछले वर्ष कंपनी के आंतरिक खाते से कुछ धनराशि की चोरी हुई थी। हालांकि, तब कंपनी ने स्पष्ट किया था कि ग्राहकों की संपत्ति सुरक्षित है और उसने सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया है ।
वर्तमान मामले में पुलिस की जांच जारी है। कंपनी का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है और उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।
आगे की कार्रवाई
अदालत ने दोनों संस्थापकों को 23 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस बीच पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिरकार यह धोखाधड़ी कैसे हुई और इसमें कॉइनडीसीएक्स के संस्थापकों की भूमिका क्या थी ।
कंपनी की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि यह पहचान चोरी करने वाले ठगों का मामला है। अब आने वाले दिनों में पुलिस जांच और अदालती सुनवाई के दौरान इस मामले की असली तस्वीर सामने आनी तय है।
नोट: यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और कंपनी के आधिकारिक बयानों पर आधारित है। यह एक विकासशील मामला है, नई जानकारी मिलने पर विवरण में बदलाव संभव है।
