नई दिल्ली, 22 मार्च 2026 – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मार्च महीने में भारतीय शेयर बाजार से अब तक 88,180 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर ली है। यह लगातार बिकवाली का 17वां दिन है और यह अब तक की दूसरी सबसे बड़ी मासिक निकासी बन गई है ।
एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने इस महीने के हर कारोबारी दिन शुद्ध बिकवाली की है। यह लगातार बिकवाली का सिलसिला ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुख जोखिम से बचाव वाला हो गया है ।
क्यों हो रही है इतनी बड़ी निकासी?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बड़ी निकासी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से तेल आपूर्ति पर संकट गहरा गया है, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं । विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक उभरते बाजारों में अपने जोखिम को कम कर रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चा तेल 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर दबाव बढ़ गया है। तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू महंगाई को बढ़ावा देती हैं और सरकारी राजकोषीय घाटे को भी प्रभावित करती हैं । निवेशकों को चिंता है कि इससे भारतीय कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।
रुपये में गिरावट
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92 रुपये के स्तर के करीब पहुंच गया है। रुपये में आई इस गिरावट ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजारों में निवेश को कम आकर्षक बना दिया है । जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर डॉलर के हिसाब से कम रिटर्न मिलता है।
अमेरिकी ब्याज दरों में अनिश्चितता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल की बैठक में संकेत दिया है कि ब्याज दरों में कटौती जल्दी नहीं हो सकती है। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहने से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों की बजाय अमेरिकी बॉन्ड जैसे सुरक्षित और ब्याज देने वाले निवेशों की ओर आकर्षित हो रहे हैं ।
किन सेक्टरों पर सबसे अधिक असर?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे अधिक असर वित्तीय सेवा क्षेत्र पर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने इस महीने वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों में 31,831 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है ।
इसके अलावा, आईटी, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों में भी विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक यह बिकवाली का दौर जारी रह सकता है ।
यह निकासी कितनी बड़ी है?
88,180 करोड़ रुपये की यह निकासी अब तक की दूसरी सबसे बड़ी मासिक निकासी है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो था ।
मार्च महीने में अब तक हर कारोबारी दिन विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाली कर रहे हैं। यह लगातार बिकवाली का सिलसिला दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों के प्रति रुख कितना सतर्क हो गया है ।
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा
विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार में सहारा देने का काम किया है। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने इस महीने अब तक 65,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की है ।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने विदेशी निकासी के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर दिया है। हालांकि, अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसी गति से जारी रही, तो घरेलू संस्थानों के लिए अकेले बाजार को संभालना मुश्किल हो सकता है ।
निवेशकों के लिए क्या है आगे की राह?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख कई कारकों पर निर्भर करेगा:
तेल की कीमतें
अगर कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है। वहीं, अगर तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो इससे निवेशकों का भरोसा वापस लौट सकता है ।
पश्चिम एशिया में स्थिति
ईरान-इजरायल संघर्ष में किसी भी तरह की कूटनीतिक सफलता या संघर्ष विराम से बाजारों में स्थिरता आ सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक इस क्षेत्र में तनाव बना रहेगा, विदेशी निवेशक सतर्क बने रहेंगे ।
अमेरिकी फेड का रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी बयान और ब्याज दरों पर संकेत विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे। अगर फेड ब्याज दरों में कटौती के संकेत देता है, तो इससे उभरते बाजारों में निवेश बढ़ सकता है ।
रुपये की स्थिति
रुपये में स्थिरता आने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से रुपये को स्थिर रखने के प्रयासों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है ।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा बिकवाली अस्थायी हो सकती है और भारतीय बाजारों के मूलभूत मजबूत आधार बने हुए हैं।
एक वरिष्ठ बाजार विश्लेषक ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर अभी भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। कंपनियों की कमाई में वृद्धि जारी है और घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत है। जैसे ही वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य होगी, विदेशी निवेशक वापस लौट सकते हैं ।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं और पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचा, तो विदेशी निवेशकों की निकासी और बढ़ सकती है ।
निष्कर्ष
मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों द्वारा 88,180 करोड़ रुपये की निकासी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर को दर्शाती है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ब्याज दरों में अनिश्चितता जैसे वैश्विक कारकों का असर भारतीय बाजारों पर साफ दिख रहा है ।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के रुख पर नजर बनी रहेगी।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए, विशेषज्ञ इस मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देखने की सलाह देते हैं, लेकिन साथ ही सतर्कता और विविधीकरण पर जोर देते हैं ।
नोट: यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और बाजार आंकड़ों पर आधारित है। निवेश से जुड़े निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
