नई दिल्ली, 22 मार्च 2026 – लीवर कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक अहम रिसर्च सामने आई है। अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि क्षतिग्रस्त लीवर वाले लोगों में प्रोटीन का सेवन कम करने से लीवर ट्यूमर की वृद्धि को धीमा किया जा सकता है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है .
शोध के अनुसार, जब लीवर ठीक से काम नहीं कर पाता, तो प्रोटीन के टूटने से बनने वाला अमोनिया शरीर में जमा होने लगता है। यह अमोनिया कैंसर कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का काम करता है और ट्यूमर को तेजी से बढ़ने में सहायक होता है .
कैसे काम करता है यह तंत्र?
जब हम प्रोटीन युक्त भोजन खाते हैं, तो शरीर में नाइट्रोजन पहुंचती है, जो अमोनिया में बदल जाती है। स्वस्थ लीवर इस अमोनिया को यूरिया में बदलकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लीवर में बीमारी होती है—जैसे फैटी लीवर, हेपेटाइटिस, सिरोसिस या कैंसर—तो यह प्रक्रिया प्रभावित होती है .
शोध के प्रमुख लेखक और रटगर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वेई-क्सिंग जोंग ने बताया कि अमोनिया कोशिकाओं में अमीनो एसिड और न्यूक्लियोटाइड्स में शामिल हो जाता है, जो ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। इस तरह लीवर की यह विफलता कैंसर को बढ़ावा देती है .
चूहों पर हुआ परीक्षण, परिणाम उत्साहजनक
शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग करते हुए पाया कि जिन चूहों में अमोनिया साफ करने वाले एंजाइम कमजोर थे, उनमें ट्यूमर तेजी से बढ़ा और जल्दी मौत हुई। जब इन चूहों को कम प्रोटीन वाला आहार दिया गया, तो उनके शरीर में अमोनिया का स्तर घट गया, ट्यूमर की वृद्धि धीमी हुई और उनकी जीवन अवधि बढ़ गई .
शोध में यह भी पाया गया कि कम प्रोटीन वाले आहार ने न केवल अमोनिया कम किया, बल्कि ट्यूमर कोशिकाओं के विभाजन और विकास से जुड़े संकेतों को भी कमजोर कर दिया .
किन लोगों पर लागू होती है यह सलाह?
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह सलाह सभी के लिए नहीं है। स्वस्थ लीवर वाले लोग सामान्य मात्रा में प्रोटीन ले सकते हैं, क्योंकि उनका शरीर अमोनिया को सही तरीके से बाहर निकाल देता है .
लेकिन जिन लोगों को निम्नलिखित समस्याएं हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है:
- फैटी लीवर रोग (दुनिया के एक बड़े हिस्से के वयस्कों को यह समस्या है)
- वायरल हेपेटाइटिस (बी और सी)
- सिरोसिस (लीवर में स्कारिंग)
- लीवर कैंसर
प्रोफेसर जोंग का कहना है कि अगर किसी को लीवर से जुड़ी कोई बीमारी है और लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा, तो उसे कैंसर का खतरा कम करने के लिए प्रोटीन का सेवन कम करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए .
कैंसर के मरीजों के लिए चेतावनी
हालांकि यह शोध उत्साहजनक है, लेकिन विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। आमतौर पर कैंसर के मरीजों को इलाज के दौरान मांसपेशियों और ताकत बनाए रखने के लिए अधिक प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है .
प्रोफेसर जोंग का कहना है कि प्रोटीन का सेवन कम करना अमोनिया का स्तर घटाने का सबसे आसान तरीका हो सकता है, लेकिन यह फैसला डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और प्रोटीन की मात्रा लीवर की कार्यक्षमता पर निर्भर करेगी .
लीवर कैंसर के आंकड़े
कैंसर से जुड़ी संस्थाओं के अनुमान के अनुसार, हर साल दुनियाभर में लीवर कैंसर के हजारों नए मामले सामने आते हैं। लीवर कैंसर से पीड़ित मरीजों की जीवित रहने की दर अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है .
आगे की राह
यह शोध अब तक चूहों पर किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्यों पर इसके प्रभाव को समझने के लिए और अध्ययन की जरूरत है। अगले चरण में यह देखा जाएगा कि प्रोटीन की कितनी मात्रा सुरक्षित है और किन मरीजों को इससे सबसे अधिक लाभ हो सकता है .
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस अध्ययन से लीवर कैंसर के इलाज में नए आहार संबंधी दृष्टिकोण विकसित किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।
नोट: यह लेख रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोध और साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन पर आधारित है। कोई भी आहार परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।
